कामकाज में सुधार नहीं हुआ तो कड़ी कार्रवाई – नगर परिषद को धन की कमी नहीं होने देने का आश्वासन…
गडचिरोली :
नगर परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं पार्षदों द्वारा पदभार ग्रहण करने के बाद शहर की जनता से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना चाहिए। जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना और उनका विश्वास अर्जित करना ही जनप्रतिनिधियों की वास्तविक जिम्मेदारी है, यह प्रतिपादन सहपालकमंत्री एडवोकेट आशिष जयस्वाल ने किया।
नगर परिषद के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों एवं पार्षदों के साथ आयोजित बैठक में वे बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पार्षदों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों का गहन अध्ययन करना चाहिए तथा केंद्र सरकार, राज्य सरकार और जिला विकास निधि के माध्यम से नगर परिषद के लिए अधिकाधिक निधि कैसे प्राप्त की जा सकती है, इसकी नियमावली और प्रक्रिया को समझना आवश्यक है। इसके लिए पार्षदों और पदाधिकारियों हेतु विशेष कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश भी उन्होंने दिए।
बैठक के दौरान सत्ताधारी एवं विपक्षी दल के पार्षदों ने शहर की गंभीर समस्याओं की ओर सहपालकमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। इनमें स्वच्छता व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल आपूर्ति, रिंग रोड, डंपिंग यार्ड, कचरा निस्तारण तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी समस्याएं प्रमुख रहीं। इन मुद्दों पर सहपालकमंत्री ने नगर परिषद गडचिरोली के मुख्याधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए सभी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर और तत्काल समाधान करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

मुख्याधिकारी को चेतावनी : लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं…
बैठक में पार्षदों ने मुख्याधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए। बताया गया कि पूर्व में प्राप्त अनेक शिकायतों के बाद मुख्याधिकारी के विरुद्ध एसआईटी जांच प्रारंभ की गई है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया के कारण उस पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा सका। इस पर सहपालकमंत्री ने कहा कि अब जांच को गति दी जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सभी पार्षदों से अपील की कि वे मौखिक शिकायतों के बजाय सभी शिकायतें लिखित रूप में प्रस्तुत करें। स्वच्छता, स्वास्थ्य और जलापूर्ति विभागों में जानबूझकर की गई अनदेखी पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी, ऐसी सख्त चेतावनी भी उन्होंने मुख्याधिकारी को दी।
बैठक में नगराध्यक्ष ने यह मुद्दा उठाया कि नगर परिषद द्वारा प्रस्तावित विकास कार्यों और महत्वपूर्ण पत्राचारों की मुख्याधिकारी द्वारा जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। इस पर सहपालकमंत्री ने मुख्याधिकारी को नगराध्यक्ष और पार्षदों द्वारा सुझाए गए सभी कार्यों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
चार वर्षों से मनमाने प्रशासन का आरोप…
पार्षदों ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों से जब नगर परिषद प्रशासनिक नियंत्रण में थी, तब मुख्याधिकारी द्वारा मनमाने ढंग से कार्य कर नगर परिषद को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। इस पर सहपालकमंत्री ने सभी शिकायतें सीधे लिखित रूप में अपने पास भेजने को कहा और आश्वासन दिया कि वे स्वयं इस मामले में तत्काल और कठोर कार्रवाई करेंगे।
साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शहर के विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। यदि सही नियोजन, आपसी समन्वय और शासन के समक्ष ठोस प्रस्ताव रखे गए, तो सभी विकास कार्य समय पर पूर्ण किए जाएंगे, ऐसा भरोसा उन्होंने दिलाया।
इस बैठक में विधायक डॉ. मिलिंद नरोटे, जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा, नगराध्यक्ष एडवोकेट प्रणोती निम्बोरकर, विषय समितियों के पदाधिकारी, सभी पार्षद तथा मुख्याधिकारी सूर्यकांत पिदुरकर उपस्थित थे।




