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गडचिरोली अब पिछड़ा नहीं, बनेगा ‘स्टील सिटी ऑफ इंडिया’ माओवाद से मुक्त होकर उद्योग, शिक्षा और रोजगार का नया केंद्र बनता जिला…

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गडचिरोली (महाराष्ट्र):

कभी महाराष्ट्र का सबसे पिछड़ा, माओवाद से प्रभावित और प्रति व्यक्ति आय में सबसे निचले पायदान पर गिना जाने वाला गडचिरोली जिला अब इतिहास बदलने की दहलीज़ पर खड़ा है। बीते दस वर्षों में सरकार के सुनियोजित और सख्त प्रयासों से न केवल माओवाद पर निर्णायक प्रहार किया गया है, बल्कि जिले को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए औद्योगिक और आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार ने गडचिरोली को माओवाद से मुक्त करने, युवाओं को शिक्षा व रोजगार से जोड़ने और जिले को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले 2 से 3 वर्षों में गडचिरोली की पहचान माओवाद नहीं, बल्कि उद्योग और विकास से होगी।

खनिज संपदा बनेगी विकास की रीढ़…

मुख्यमंत्री ने कहा कि गडचिरोली खनिज संसाधनों से भरपूर जिला है, जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दे सकता है। इसी क्षमता को देखते हुए यहां माइनिंग गतिविधियों को अनुमति दी गई और स्टील उद्योग को प्रोत्साहन मिला।

उन्होंने लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड की सराहना करते हुए कहा कि कंपनी ने कठिन परिस्थितियों में साहस दिखाते हुए निवेश किया और हजारों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया।

3 लाख करोड़ का निवेश, 1 लाख तक रोजगार…

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि गडचिरोली जिले में अब तक करीब 3 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं से 75 हजार से 1 लाख तक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

स्थानीय युवाओं को उद्योगों के अनुरूप कुशल बनाने के लिए गोंडवाना विश्वविद्यालय और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित की गई है।

इंडस्ट्री–एकेडमी कोलैबोरेशन से बदलेगा भविष्य…

यूआईटी (UIT) के माध्यम से इंडस्ट्री और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को जमीन पर उतारा गया है। उद्योगों की जरूरतों के अनुसार विशेष पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं।

लॉयड्स मेटल्स द्वारा 25 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता से शैक्षणिक भवन, कोर्स संचालन, छात्रावास और परिवहन सुविधाएं शुरू की गई हैं। यहां डिप्लोमा कोर्स पहले ही प्रारंभ हो चुके हैं और जल्द ही डिग्री कोर्स भी शुरू किए जाएंगे।

माइनिंग से लेकर एआई तक आधुनिक शिक्षा…

मुख्यमंत्री ने बताया कि गडचिरोली में अब माइनिंग, मेटलर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, कंप्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक विषयों की पढ़ाई कराई जा रही है।

इसके साथ ही लैंग्वेज लैब स्थापित की गई हैं, जिससे आदिवासी और ग्रामीण छात्र आत्मविश्वास के साथ अंग्रेज़ी में संवाद कर पा रहे हैं। उन्होंने एक आदिवासी छात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल चार महीनों में उसके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला।

अब चतुर्थ श्रेणी नहीं, क्लास-1 और क्लास-2 की तैयारी…

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से छात्रों की सोच और दृष्टिकोण में बड़ा परिवर्तन आया है। अब गडचिरोली का मानव संसाधन केवल चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्लास-1 और क्लास-2 स्तर की जिम्मेदारियों के लिए भी तैयार किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा का अवसर…

मुख्यमंत्री ने बताया कि गोंडवाना विश्वविद्यालय का ऑस्ट्रेलिया की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से करार हुआ है। इसके तहत गडचिरोली के छात्र विदेश में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

माइनिंग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया विश्व में अग्रणी है, जिससे यहां के छात्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण…

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास के साथ-साथ “जल, जंगल और जमीन” की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

गडचिरोली में 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है, जिनमें से अब तक 40 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। उद्योगों से होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव की भरपाई कई गुना अधिक हरित कार्यों से की जाएगी।

2026 से एयरपोर्ट निर्माण, बनेगा दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार…

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वर्ष 2026 से गडचिरोली में एयरपोर्ट निर्माण कार्य शुरू होगा। एयरपोर्ट के बाद गडचिरोली दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार (Gateway to South India) बनेगा।

नागपुर–गडचिरोली कनेक्टिविटी, समृद्धि महामार्ग और माइनिंग कॉरिडोर से जिले का विकास और तेज़ होगा।

‘स्टील सिटी ऑफ इंडिया’ बनने का संकल्प…

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि गडचिरोली को भविष्य में “स्टील सिटी ऑफ इंडिया” के रूप में विकसित किया जाए—एक ऐसा जिला जो हरित, प्रदूषण-मुक्त, औद्योगिक और आर्थिक रूप से समृद्ध हो।

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